एक बार एक गाँव था । सुन्दर, शांत और खुशहाल । उस गाँव में एक व्यक्ति रहता था । मेहनत और लगन से वो एक सरकारी महकमे में नौकरी भी पा गया था । वह रोज़ समय से उठता और अपने घर के लिए कुँए का पानी खुद भरने जाता । फिर समय से तैयार हो समय से ट्रेन पकड़ काम पर निकल जाता । यही उसकी दिनचर्या थी । व्यक्ति व्यवहार कुशल था , मेहनती था , गुणवान था इसलिए सब उसे पसंद करते थे ।

कुँए में पानी का स्तर नीचे जाने के कारण अक्सर बाल्टी कई जगह टकराती थी , इससे कुछ समय में उसमें छोटे छोटे छेद हो जाते थे । जिनसे पानी रिसता था । पर उस आदमी ने कभी शिकायत नहीं करी । अगर ज़्यादा पानी बह जाता तो वह दुबारा कुँए पर जाकर पानी भर लाता । कई चक्कर लगाता । सभी गाँव वाले उसकी इस मेहनत की कद्र करते और व्यवहार कुशलता की तारीफ करते न थकते । उस आदमी को लोगों के इस नज़रिए से ही संतोष पहुँच जाता था ।

इसी गाँव में एक और व्यक्ति था । उसकी भी दिनचर्या कुछ ऐसी ही थी । वो सुबह होते ही, कभी कभी पौ फटने से पहले ही कुँए पर पहुँच जाता और पानी भर लाता । व्यवहार कुशल तो था पर उसे सबसे अधिक गाँव का लुहार जानता था जिससे वो प्राय : अपनी बाल्टी ठीक कराया करता । फिर जैसे ही घर का काम खत्म होता वो काम पर निकल जाता । काम पर जाने के लिए वो सही समय का इंतज़ार नहीं करता था बस पहला मौका मिलते ही निकल जाता था ।

यह क्रम कई वर्षों तक चला और फिर एक दिन अचानक पता चला कि यही दूसरा आदमी अपने महकमे में एक बहुत बड़ा अफसर बन गया है । उसकी इस तरक्की से पूरा गाँव गौरवान्वित भी हुआ और हैरान भी ।

जीवन में सफलता उन्ही को मिलती है जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए कुछ अधिक करने का प्रयत्न करते हैं । संभव है कि ये निष्ठा आसानी से दुनिया की नज़र में न आये पर हमें विचलित नहीं होना चाहिए और निरंतर अपने कार्य में मग्न रहना चाहिए ।