चन्द पंक्तियों को, कलम से लिख देने पे,
कैसे तैयार हो जाती कविता।
मूक मन के भावो को, पन्नो में उतार देने पे,
कैसे दिल का हाल बतलाती कविता।
बेबसी की तड़पन को, शब्दों से उभार देने पे,
कैसे दर्द का एहसास कराती कविता।
आखिर क्या है कविता, क्यों इससे लगाव ही हो जाता है।
सुन इसकी वेदना को, क्यों मन विचलित हो जाता है।
क्यों है इतनी करुना इसमें, कि इसी से प्यार हो जाता है।
सागर की गहराईयों से, गहरा अर्थ इसका होता है …
शब्दों को चुन-बुन कर बने, समझना इसे मुश्किल सा लगता है।
यह होती जेसे जटिल पहेली, हर कोई इसमें उलझता है …
दिल में रहे हर-दम बसी, मतलब फिर भी क्यों नहीं इसका सूझता है।।
जवानी की धड़कन में, प्यार की अड़चन में,
कैसे तड़पाती है कविता।
पायल की छन-छन में, चूड़ियों की खन-खन में,
कैसे तरसाती है कविता।
उलझ गया हो शब्दों की उलझन में, मैं केसे जानू,
क्या होती कविता।
आखिर क्या है कविता, क्यों यह इक जोश सा दिलाती है।
कलम और पन्नो के हथियार से, क्यों यह जूनून ही बन जाती है।
क्यों है यह असरदार इतनी, कि सभी सवालों को यह रोंद जाती है।
कविता की अपनी अलग ही भाषा है, दिल ने इसे सोच से तराशा है …
मन को भी सुझ लेती है, भावनाओं की ऐसी परिभाषा है।
कर महसूस सकते हो इसे अभी, बस इक बार तुम भी जरा!
मेरी नजरों से देखो, दिल में उतर जाएगी – ऐसी मेरी आशा है।।
 
हर किसी के दिल में, इक कविता बसी रहती है,
हर किसी के मन में, इक कविता बुझी रहती है।
इक कविता से, कवि के दिल की मिठास छलकती है।
इक कविता से, कवि के मन की प्यास झलकती है।
इक कविता में, कवि की  दास्ताँ दिखती है।
इक कविता में, कवि की आत्मा  बसती है।
कोई इस कविता से, प्यार का इजहार करता है।
तो कोई इस कविता से, बिन हिंसा के वार करता है।
 
कविता तो बस कविता होती है, इक कविता दुनिया ही बदल देती है,
किसी को यह हंसाती है, तो किसी को यह रुलाती है।
कविता चारों ओर है बसी, हर कण में कविता पनपती है,
कविता ने है यह दुनिया सींची, पत्थरों से भी कविता उभरती है।
 
है कविता फूलों से भरे मधुवन में, कविता है छिपी सितार की धुन में,
चांदनी रात में है कविता, उगते सूरज में है कविता,
कोई कविता के लिए जीता है, तो किसी को जीने की राह दिखाती कविता।
है कविता बरखा की रिम-झिम में, कविता है गिरती औंस की बूँद में,
हर रंग-तरंग में है कविता, हर उमंग सी मचलती है कविता,
कोई कविता पे करता अभिमान है, तो किसी के अभिमान को ठुकराती कविता।
है कविता सब के दिल में बसी, कविता है सब के मन में रची,
गीता की सीखों में कविता, माँ की लोरी में है कविता,
कोई कविता से प्यार करता है, तो किसी से प्यार करती कविता।
कविता तो  – कविता है, महसूस कर सको तो दिल इसने जीता है।
वरना ! बुझती लों के समान, गूम हो जाती – ऐसी ही यह सरिता है।।